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नवंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुंदरता पर अपना नजरिया

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कितना खूबसूरत लिखा है.... महसूस मन से पढ़िए और दिल से महसूस करिए💓💓💓💓 कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं। इतनी सुन्दर कि उनपर मोटी किताब लिख दी जाय फिर भी बात खत्म न हो... इस तस्वीर को ही देखिये, जाने कितने अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर हैं इस तस्वीर में...  स्त्रियों के पांव बहुत सुन्दर होते हैं। इतने सुन्दर, कि सभ्यता उन पांवों की महावर वाली छाप अपने आँचल में सँजो कर रखती है। पुरुषों के पांव उतने सुन्दर नहीं होते...उभरी हुई नशें, निकली हुई हड्डियां, फ़टी हुई एड़ियां... ठीक वैसे ही, जैसे मोर के पांव सुन्दर नहीं होते...     मैं ठेंठ देहाती की तरह सोचता हूँ। एक आम देहाती पुरुष अपने पैरों को केवल इसलिए कुरूप बना लेता है, ताकि उसकी स्त्री अपने सुन्दर पैरों में मेहदी रचा सके। स्त्री के पांव में बिवाई न फटे, इसी का जतन करते करते उसके पांव में बिवाई फट जाती है।    स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।      ईश्वर ने गढ़ते समय पुरुष और स्त्...

मेरी पन्ना यात्रा

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मेरी पन्ना यात्रा *पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक शहर है।वैसे तो पन्ना हीरे की खदानो के लिए और बाघ के लिए पहले से ही बहुत चर्चा में रहता है ।*  पर आज हमलोग हीरा और बाघ से हटकर अद्वितीय बलदेव मन्दिर की चर्चा करते हैं।यह पौराणेतहासिक नगर है इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्मपुराण में *किलकिल प्रदेश* से आता है वाकटाक वंश की उत्पत्ति स्थल है। नागवंश की कुलदेवी *पद्मावती* किलकिला नदी के तीरे विराजित हैं इसके कारण इसका नाम *पद्मा* और बाद में *परना* फिर  *झिरना* और फिर 1933 के बाद *पन्ना* हुआ। *तो आइये चलते है बुंदेलखंड के आंचल पन्ना जिले में* हमलोग पंहुंचे ही थे कि सौजन्य भाई ने फोन निकाला और फोन किया हर दिल अजीज बड़े भाई मुकेश पांडेय जी को उन्होंने बलदेव मन्दिर पर आने को कहा हम लोग बलदेव मन्दिर के सामने ही खड़े थे कि मध्यप्रदेश शासन की गाड़ी आकर रुकी पांडेय जी से सबकी औपचारिक मुलाकात हुई और सबने बलदाऊ भैया के दर्शन किये फिर मन्दिर के इतिहास भूगोल की जानकारी पांडेय जी से ली गयी और फिर पांडेय जी ने चंदन की खुशबू से लबालब भरा एक रसमलाई का डिब्बा  निकाला सब लोगो ने खाया फोटो भी ...

मेरे जीवन साथी

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तुम प्रीत हो इस जीवन की, तुम ही हो इसकी उमंग, संगिनी नहीं एक जीवन की ही, हो हर जीवन तेरे संग। डोर हो तुम मेरे जीवन की, तुमसे बांधी अपनी पतंग, उड़ती जाती जीवन-नभ में ऊंची, तुम ही हो इसकी तरंग। तुम बरसात हो सूखे जीवन में, तुम ही इसकी अभिलाषा, संचार किया तुमने जीवन, तुमने ही जगाई मुझमें आशा। मैं तो था एक खोटा पत्थर, था तुमने ही मुझ को तराशा, हो जीवन का वो हर पल मेरा, जिसमें प्यार तेरा हो जरा सा। तुम खुशबू हो मेरे जीवन की, तुम ही हो इसको महकाती। अमर हो जाए जीवन-गीत मेरा,जब तुम हो इसको गाती। संगीत तुम्ही इस बगिया का,खिलती तुमसे ही हर पाती, हर पल हो साथ मेरे तुम, तुम ही हो मेरी जीवनसाथी।। 🥰💞❤️💐 विवेकाजल ✍️

चर्चा चाय पर भावना मन की

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मुझे तुम्हारे साथ टपरी पर एक चाय पीनी है चाय पीते पीते चुपके से देखना है मुझे मेरे लिए तुम्हारा प्यार औरों की नजरों से मुझे बचाना ऐसी जगह पर चाय नहीं पीते हैं बोल के  किनारे में ले जाना मैं तुम्हारी सारी मनोदशा जानता हूं लेकिन मुझे वो महसूस करना है वो  जो तुम्हारी बातो में चाय और तुमसे मेरा रिश्ता कभी खत्म नहीं हो सकता क्योंकि चाय मेरी हर शारीरिक समस्या का हल है और तुम मेरी हर मानसिक समस्या का हल तुमसे अपनी समस्या कहते ही  मन हल्का हो जाता है जैसे चाय पीने के बाद सर विवेकाजल✍️✍️💞

दो जवाब मेरे सवालों के

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मेरे सवालों के जवाब दो.... अगर प्रेम है मुझसे  तो इतने प्रतिबंध क्यों है मन पर? क्यों कोई बात तुम  लफ्जों से नहीं कहते? क्यों शब्द तुम्हारे होंठों पर आके  रुक जाते हैं? क्यों हर बात तुम  अपने सीने में दफन कर लेते हो ? अगर प्रेम है मुझसे  तो शब्द क्यों नहीं होते हमारे बीच? क्यों हर बात सिर्फ कोई, कहीं, कुछ नही तक सीमित रहती है क्यों छुपा लेते हो तुम अपनी हर भावना को क्यों हर बात एक राज रहती है? अगर प्रेम है मुझसे तो क्यों कुछ निश्चित से शब्द होते हैं  हमारे वार्तालाप में?  क्या बस यही मोहब्बत होती है? क्या तुम विश्वास नहीं करते मुझ पर या दूसरों से मिले अनुभवों की सजा देते हो मुझे? अगर प्रेम है मुझसे तो क्यों हर सवाल का जवाब अधूरा देते हो?  क्यों मुझे हर बात में उलझा देते हो ? क्या मैं जानता नही हूँ  यह तुम्हारा स्वभाव है  या हमारे दरमियां कुछ दूरियां हैं?  बहुत अधूरा सा लगता है जैसे कोई मेरा होके भी मेरा नहीं है। अगर प्रेम है मुझसे तो क्यों खड़ी कर रखी है  इतनी खामोशियों की दीवारें हमारे बीच तुमने? किस भेद के खुलने क...

भड़िया वाले रोसेगुल्ला

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भड़िया वाले रसगुल्ले अपने देश की विशेषता है कि प्रत्येक क्षेत्र किसी न किसी स्वाद में अग्रणी है। कोई स्वाद राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ तो कोई स्थानीय स्तर पर ही अपनी छाप छोड़ पाया। इसी क्रम में आज चर्चा करेंगे चकलवंशी के प्रसिद्ध रसगुल्लों की। सामन्यतया बंगाल में रसगुल्लों का आशय छेने के रसगुल्लों से होता है किंतु उत्तरप्रदेश में गुलाब जामुन, काला जाम को भी रसगुल्ला नाम से ही जाना जाता है। आइये पहले चर्चा स्थान की कर ली जाए क्योंकि बात ही स्थानीय स्वाद की हो रही है। उन्नाव से हरदोई राज्यमार्ग और बिठूर से सण्डीला राज्य मार्ग जहाँ पर एक दूसरे को काटते हैं वही स्थान नक्शे में चकलवंशी नाम से जाना जाता है। यह स्थान उन्नाव जनपद के सफीपुर विकास खण्ड के अंतर्गत आता है। उन्नाव से इसकी दूरी लगभग सैंतीस किमी होगी तथा बिठूर से बीस किमी की दूरी पर यह कस्बा है। जब आप चकलवंशी चौराहे पर पहुँचेंगे तो आपको रस गुल्ले की बहुत सी दुकानें मिलेंगी। जब किसी स्थान की कोई चीज प्रसिद्ध हो जाती है तो आस पास उसी वस्तु की कई दुकानें खुल जाती हैं तो वास्तविक दुकान को पहचानना थोड़ा मुश्किल होत...

शास्त्रों में स्त्रियों की निंदा

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शास्त्रों में स्त्रियों की निन्दा स्त्री स्त्रियाँ केवल भोगसामग्री या बच्चा पैदा करने का यन्त्र ही नहीं, अपितु, वे प्रत्यक्ष लक्ष्मी है। उनके सतीत्व की विशेषता से वेद-शास्त्र पुराणों के अमित पृष्ठ रञ्जित हैं। पुरुष के चरित्र भ्रष्ट होने पर वहाँ उन दुष्परिणामों का भोक्ता होता है, स्त्री का चरित्र भ्रष्ट होने से मातृ पितृकुल दोनों ही कलंकित और अपमानित होते हैं। स्त्रियां सदाचारिणी एवं पतिव्रता रहकर पतिकुल तथा पितृकुल दोनों का कल्याण कर सकतीं है। सती नारी साक्षात् गङ्गा किं वा उमामहेश्वरस्वरूप मानी गयी हैं— न गङ्गया तया भेदो या नारी पतिदेवता । उमामहेश्वरः साक्षात् तस्मात्तां पूजयेद् बुधः । । स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु । त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् । । इत्यादि भावनाओं के सामने क्षुद्र विषयेन्द्रिय सम्प्रयोगज सुखों का कितना मूल्य रह जाता है? स्त्रियों के इन्हीं उदात्त भावों के रक्षार्थ धर्मशास्त्रों के कठोर नियम है। यद्यपि तर्क की दृष्टि से कहा जा सकता है कि ये ही नियम पुरुषों के लिए भी उचित होने चाहिए, तथापि धर्मशास्त्रों ने शरीर, इन्द्रिय, स्वभाव, शक्ति, प्रकृति की व...

समोसा

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ब्रह्माण्ड के किसी भी हलवाई की दुकान पर दो चीजें होना जरूरी है वर्ना वह दूकान हलवाई की दूकान नहीं कहलाती.... पहला तो हलवाई खुद और दूसरा समोसा ! संसार की एकमात्र ऐसी रचना जिसके तीन कोने होने के बावजूद भी शान से सीना तान कर खड़ा हो जाता है .... .हलवाई की दुकान पर जब समोसे भर कर रखे जाते है तो तले जाने से पहले पूरी समोसा मंडली पंक्तिबद्ध रूप से यूँ ट्रे में खड़े दिखती हैं मानो सफ़ेद वर्दी पहने जवान सावधान की मुद्रा में खड़े होकर गार्ड ऑफ़ ऑनर दे रहे हों। अपने इसी शाही अन्दाज़ के कारण सैकड़ों वर्षों से समोसा स्नैक फ़ूड का अघोषित सम्राट है और अपनी दो महारानियों यानी कि हरी चटनी और लाल चटनी के साथ फूडीयों के दिलों में राज करता है। अमीर-गरीब में फर्क नहीं करता.....एयरपोर्ट लाउंज की फैंसी लुटेरी कॉफ़ी शॉप में "टू समोसास फॉर टू हंड्रेड फिफ्टी रूपीज़" में भी मिलता है और डाकखाने के सामने टीन के पतरे को लोहे की तार के साथ बिजली के पुराने खम्भे के साथ बाँध कर बनायी गई टपरी पर “दस के दो” भी मिलता है......ताज़ होटल की चाँदी की प्लेट में भी परोसा जाता है और पुल के नीचे वाले ...

मेरे जीवन साथी

 जीवन साथी तुम प्रीत हो इस जीवन की, तुम ही हो इसकी उमंग, संगिनी नहीं एक जीवन की ही, हो हर जीवन तेरे संग। डोर हो तुम मेरे जीवन की, तुमसे बांधी अपनी पतंग, उड़ती जाती जीवन-नभ में ऊंची, तुम ही हो इसकी तरंग। तुम बरसात हो सूखे जीवन में, तुम ही इसकी अभिलाषा, संचार किया तुमने जीवन, तुमने ही जगाई मुझमें आशा। मैं तो था एक खोटा पत्थर, था तुमने ही मुझ को तराशा, हो जीवन का वो हर पल मेरा, जिसमें प्यार तेरा हो जरा सा। तुम खुशबू हो मेरे जीवन की, तुम ही हो इसको महकाती। अमर हो जाए जीवन-गीत मेरा,जब तुम हो इसको गाती। संगीत तुम्ही इस बगिया का,खिलती तुमसे ही हर पाती, हर पल हो साथ मेरे तुम, तुम ही हो मेरी जीवनसाथी।। 🥰💞❤️💐 विवेकाजल ✍️