खुशियां
नए बहाने ढूँढ लाऐ, कुछ तुम मेरे दिल तक आओ, कुछ हम तुम्हारे दिल तक आऐ । चलो मुस्कुराने की, कोई वजह ढूंढ लाऐ, दूर रहने से दूरियाँ बढती है, थोङी दूरी तुम तय करो मुझ तक थोड़े पास हम चले आऐ तुझ तक। विवेक कुमार मिश्र✍️
शबरी के बेर, सुदामा के तंदुल, विदुर की भाजी - क्या इनका कोई मोल हो सकता है। महत्व इस बात का है कि हम जो दे रहे है उसमें अपना हृदय उड़ेल रहे है या नहीं। हर हर महादेव