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प्रिय प्रेयसी

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प्रिय प्रेयसी~           तुमने कभी शाख से अलग हो चुके पत्तों का प्रेम देखा है, नहीं देखा होगा, पतझड़ में जब बूढ़े हो चुके पत्तों की पकड़ शाख पर कमजोर हो जाती है, तो वो टूट कर गिर जाते हैं, पर उनका प्रेम तब भी नहीं मरता, वो इंतज़ार में होते है, एक हवा के झोंके की, जो उन्हें उड़ा कर ले जाये उस पेड़ की तरफ जिनसे उनका बिछड़ना हुआ था, वो आखिरी बार लिपट जाना चाहते हैं, उसी पेड़ के तने से, बस अपने प्रेम के साथ अंतिम कुछ पल जीने के लिए, किन्तु उस झोंके की आने की उम्मीद लगभग न के बराबर होती हैं, फिर भी पत्ते बिना किसी शिकायत उसका इंतजार करते रहते हैं ।            तुम्हें पता है, दीवारों के कान ही नहीं दिल भी होते हैं, यकीन नहीं है ना, तो सुनो, तुमने कभी पुरानी तस्वीरों की जगह बदली है, बदली ही होगी, तो जब तुमने पुरानी तस्वीरें दीवारों से उतारी होगी तो वहां एक निशान दिखाई दिया होगा तुम्हें, वो निशान कुछ और नहीं यादें हैं, जो दीवार समेट लिया करती हैं खुद में, लम्बे अंतराल के लिए नए रंग चढ़ा देने के बाद भी दीवारें अपने भीतर ही उन यादों को सँजोये रखती है,...

जयतु सनातन धर्म: ,जयतु भारतीय संस्कृति:

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विवाह उपरांत जीवन साथी को छोड़ने के लिए 2 शब्दों का प्रयोग किया जाता है  1-Divorce (अंग्रेजी)  2-तलाक (उर्दू)  कृपया हिन्दी का शब्द बताए...?? कहानी आजतक के Editor... संजय सिन्हा की लिखी है...।  तब मैं... 'जनसत्ता' में... नौकरी करता था...। एक दिन खबर आई कि... एक आदमी ने झगड़े के बाद... अपनी पत्नी की हत्या कर दी...। मैंने खब़र में हेडिंग लगाई कि... "पति ने अपनी बीवी को मार डाला"...! खबर छप गई..., किसी को आपत्ति नहीं थी...। पर शाम को... दफ्तर से घर के लिए निकलते हुए... प्रधान संपादक प्रभाष जोशी जी... सीढ़ी के पास मिल गए...। मैंने उन्हें नमस्कार किया... तो कहने लगे कि... "संजय जी..., पति की... 'बीवी' नहीं होती...!" “पति की... 'बीवी' नहीं होती?” मैं चौंका था " “बीवी" तो... 'शौहर' की होती है..., 'मियाँ' की होती है..., पति की तो... 'पत्नी' होती है...! " भाषा के मामले में... प्रभाष जी के सामने मेरा टिकना मुमकिन नहीं था..., हालांकि मैं कहना चाह रहा था कि... "भाव तो साफ है न ?" बीवी कहें... या पत्नी... य...

प्रेम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💞

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वेलेंटाइन डे और ब्रेक अप ! बाज आ जाओ मुहब्बत से... मुहब्बत वालों हमने इक उम्र गंवाई है, मिला कुछ भी नहीं!! क्या जमाना आ गया है । अब प्रेम के लिये भी दिन तय कर दिया है । बाजार इस दिन को मनाने के लिए लाल-गुलाबी हुआ जा रहा है । गिफ्ट से अटा पड़ा है । लाल-लाल पान के पत्ते के आकार के तरह तरह के दिल दुकानों के बाहर लटक रहे है । छोटे से लेकर आदमकद के टेडी बियर पसरे पड़े है । बाजार ने प्रेम को भी बिकने वाली चीज बना दिया है ।  जिससे भी मिलिये.. मोहब्बत से मिलिये... लोग बताते नहीं.. मगर तन्हा बहुत हैं... किसी से कह देना...... कि, "हम तुमसे प्रेम करत हैं" अहम को खतम करने का सबसे सुंदर पड़ाव है।। हमको भी घर मे लेटे लेटे कई दिन हो गए थे आज कुछ आराम भी था और अनुज भाई भी आये थे, तो सोचा चलो प्रदर्शनी घूम आये तो दोनों लोग टहलते-टहलते प्रदर्शनी पहुंच गए । रास्ते मे बाजार की रंगीनियों ने ध्यान खींचा । प्रेम .. ये कितना प्यारा अहसास है ! कुछ सोच कर आँखों में एक पुरानी चमक लौट आयी । अगर आपने सचमुच किसी से प्रेम किया है, तो आप जानते होंगे, प्रेम जताना नही पड़ता, बताना नही पड़त...

वीथिन में, ब्रज में, नवेलिन में, वेलिन में,बनन में, बागन में, बगरो बसंत है।

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"वसंत के आते ही मौसम खुशनुमा हो जाता है, गुलाबी ठंड के साथ चारों ओर रंग बिरगें फ़ूलों की भरमार हो जाती है। खेतों में फ़ूली हुई पीली सरसों की आभा निराली हो जाती है लगता है कि धरती पीत वस्त्र धारण कर इठला रही है। रंग बिरंगी तितलियाँ फ़ूलों पर झूमती हैं तो भौरों का गुंजन मन को मोह लेता है तभी कवियों का मन भी इस सुंदरता को अपने शब्दों से बांध लेने का हो जाता है। अमिया के बौर से लदी डालियों पर कोयल की कूक भी गीत कविता का अंग बन जाती है। कहीं दूर चरवाहे की बंशी की तान से ग्राम्य सुंदरता सुरभित हो जाती है। गाँव की अल्हड़ बाला के पाँव के पायल की छनक भी प्रकृति की ताल में ताल मिलाती दिखाई देती है। अदभुत नजारा इसी मौसम में देखने मिलता है। वसंत आने पर ही मदन देव का मद महुआ के फ़ूलों के रस के रुप में प्राप्त होता है। जिससे मस्त होकर मदनोत्सव का उल्लास निराला हो जाता है। कहते हैं कि जब ब्रह्मा ने मनुष्य योनि की रचना की तो वे अपनी रचना से संतुष्ट नही हुए। उन्हे लगा कि कुछ कमी रह गयी। क्योंकि चारों ओर मौन छाया हुआ था। सन्नाटा उन्हे पसंद नहीं आया। तो उन्होने अपने कमंडल से धरती पर जल डाला तो एक अदभुत श...

प्रतीक्षा में

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प्रतीक्षारत हूँ  कब आएँगी वो चिट्ठियां  जिसके अंत में लिखा होगा  आपकी प्रतीक्षा में...  प्रारम्भ में लिखा होगा प्रिय,  मध्य में लिखी होंगी  बहुत सारी बातें  जहाँ प्रत्युत्तर में लिखा होगा  पत्र पढ़ कर प्रसन्नता हुई  कुशल रहने की प्रार्थना  और शुभेक्षा  फिर कुछ पुरानी बातें  जिन्हे याद कर  कभी रोना आया  और कभी जो  गुदगुदा गई मन को  जिन्हे पढ़ते हुए  उनकी छवि दिखे  और चेहरे पर उगती हुई  उनकी भावनाएँ ऐसा लगे जैसे  वो सामने बैठी हो, अपनी बातें बता रही हो  शब्दों में घुली चासनी का स्वाद अंतस तक उतारने का प्रयास कुछ शब्द जो  डबडबाई आँखों से  झिलमिल झिलमिल  नजर आ रहे  उनको छूकर  दूर होने का यास  न जाने कितनी बातें हैं  जो प्रतीक्षा में हैं।                                                              ...

वनन में बागन में बगरयो बसंत है

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प्रेम का उत्सव है बसंत आया न जाने कितने ही हृदयों में  अंकुरित होगा प्रेम बीज। आरंभ होगा कभी न होने वाले अंत का। उस उर में समाए आनंद का जो, समय के साथ ले लेगा परमानंद का रूप। जिसकी कल्पना मात्र मन, को प्रफुल्लित कर जायेगी। जो आत्मा में समा कर, स्वयं परमात्मा सा हो जायेगा जो रोम रोम में नव किरण सा समाएगा। पल प्रतिपल गंगा सा पावन, हो बढ़ेगा सागर की ओर। चाहे हो जंगल, बीहड़ या मरुस्थल कुछ भी न उसे रोक पायेगा। प्रेम के सागर में जो बिन सोचे समझे उतर जायेगा। संसार के भव सागर से वो पार हो जायेगा। प्रेम में उमंग है, उल्लास है। प्रेम कभी न बुझने वाली प्यास है.......!!!!! विवेकाजल✍️✍️

प्रेम तो बस प्रेम है

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जब किसी से प्रेम होने का अहसास होता है,तब न कोई अग्निसाक्षी होती है और न ही कोई सात वचन।प्रेम में बस होता है एक दूसरे को महसूस करने का एक प्यारा सा अहसास। ह्र्दय से महसूस करने का एक खूबसूरत सा अहसास जो बिना सोचे जाने एक दूसरे को एक प्यारे से बंधन में बांध देता है❤️ तुम वैभव हो मेरे मन के बसंत का और मैं उजड़ा हुआ चमन। तुम्हारी याद शीत में घाम जैसी है और मेरा इश्क सांझ की परछाईं। पल भर की तन्हाई कल जाती है तुम्हारे बिना वक्त बिताना कठिन हो जाता है तुम्हारी एक झलक के लिए निगाहें बेचैन सी हो जाती है। तुम मेरे धड़कनों की आधार हो प्रिये ।❤️❤️

मेरी पन्ना यात्रा

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मेरी पन्ना यात्रा *पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक शहर है।वैसे तो पन्ना हीरे की खदानो के लिए और बाघ के लिए पहले से ही बहुत चर्चा में रहता है ।*  पर आज हमलोग हीरा और बाघ से हटकर अद्वितीय बलदेव मन्दिर की चर्चा करते हैं।यह पौराणेतहासिक नगर है इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्मपुराण में *किलकिल प्रदेश* से आता है वाकटाक वंश की उत्पत्ति स्थल है। नागवंश की कुलदेवी *पद्मावती* किलकिला नदी के तीरे विराजित हैं इसके कारण इसका नाम *पद्मा* और बाद में *परना* फिर  *झिरना* और फिर 1933 के बाद *पन्ना* हुआ। *तो आइये चलते है बुंदेलखंड के आंचल पन्ना जिले में* हमलोग पंहुंचे ही थे कि सौजन्य भाई ने फोन निकाला और फोन किया हर दिल अजीज बड़े भाई मुकेश पांडेय जी को उन्होंने बलदेव मन्दिर पर आने को कहा हम लोग बलदेव मन्दिर के सामने ही खड़े थे कि मध्यप्रदेश शासन की गाड़ी आकर रुकी पांडेय जी से सबकी औपचारिक मुलाकात हुई और सबने बलदाऊ भैया के दर्शन किये फिर मन्दिर के इतिहास भूगोल की जानकारी पांडेय जी से ली गयी और फिर पांडेय जी ने चंदन की खुशबू से लबालब भरा एक रसमलाई का डिब्बा  निकाला सब लोगो ने खाया फोटो भी खींची गई तब तक...

क्या यही प्यार है

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सोचता हूँ क्या यही प्यार है.......❤️      अपनी उदासियों से लड़ता हुवा  उत्तराखंड के पहाड़ो पर अक्सर बैठ जाता हूँ  तुम्हारा रोज़ दूर से मुझे यूँ देखना  ज़रा भी असहज नहीं लगा                तुम्हारा मौन तुम्हारी मुस्कुराहटें  दिल के दरवाज़े पर पर दस्तक देती हैं.  सोचता हूँ ये दरवाज़ा खोल दू!!  प्रेम से अनभिज्ञ मैं साफ  ये आकर्षण महसूस कर सकता हूँ                   इसलिए अब आने के बहाने ढ़ूढ़ता हूँ  बिन जाने पहचाने आँखों के रास्ते  जो तरंगें दिल में उठती है हम दोनों के बीच  अनजाना सा ये बंधन ही प्यार है  शायद! 💞    आज का ख्याल.....   हमने तो हर वक्त तुम्हें आँखों में जीया है  तुम्हें बनाने वाले ने भी कमाल किया है..... ❤️ ✍️✍️💞

सुंदरता पर अपना नजरिया

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कितना खूबसूरत लिखा है.... महसूस मन से पढ़िए और दिल से महसूस करिए💓💓💓💓 कुछ तस्वीरें बहुत सुन्दर होती हैं। इतनी सुन्दर कि उनपर मोटी किताब लिख दी जाय फिर भी बात खत्म न हो... इस तस्वीर को ही देखिये, जाने कितने अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर हैं इस तस्वीर में...  स्त्रियों के पांव बहुत सुन्दर होते हैं। इतने सुन्दर, कि सभ्यता उन पांवों की महावर वाली छाप अपने आँचल में सँजो कर रखती है। पुरुषों के पांव उतने सुन्दर नहीं होते...उभरी हुई नशें, निकली हुई हड्डियां, फ़टी हुई एड़ियां... ठीक वैसे ही, जैसे मोर के पांव सुन्दर नहीं होते...     मैं ठेंठ देहाती की तरह सोचता हूँ। एक आम देहाती पुरुष अपने पैरों को केवल इसलिए कुरूप बना लेता है, ताकि उसकी स्त्री अपने सुन्दर पैरों में मेहदी रचा सके। स्त्री के पांव में बिवाई न फटे, इसी का जतन करते करते उसके पांव में बिवाई फट जाती है।    स्त्री नख से शिख तक सुन्दर होती है, पुरुष नहीं। पुरुष का सौंदर्य उसके चेहरे पर तब उभरता है जब वह अपने साहस के बल पर विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल कर लेता है।      ईश्वर ने गढ़ते समय पुरुष और स्त्...