प्रतीक्षा में
प्रतीक्षारत हूँ
कब आएँगी वो चिट्ठियां
जिसके अंत में लिखा होगा
आपकी प्रतीक्षा में...
प्रारम्भ में लिखा होगा प्रिय,
मध्य में लिखी होंगी
बहुत सारी बातें
जहाँ प्रत्युत्तर में लिखा होगा
पत्र पढ़ कर प्रसन्नता हुई
कुशल रहने की प्रार्थना
और शुभेक्षा
फिर कुछ पुरानी बातें
जिन्हे याद कर
कभी रोना आया
और कभी जो
गुदगुदा गई मन को
जिन्हे पढ़ते हुए
उनकी छवि दिखे
और चेहरे पर उगती हुई
उनकी भावनाएँ
ऐसा लगे जैसे
वो सामने बैठी हो,
अपनी बातें बता रही हो
शब्दों में घुली चासनी का स्वाद
अंतस तक उतारने का प्रयास
कुछ शब्द जो
डबडबाई आँखों से
झिलमिल झिलमिल
नजर आ रहे
उनको छूकर
दूर होने का यास
न जाने कितनी बातें हैं
जो प्रतीक्षा में हैं।
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