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प्रेम दिवस

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Happy_Valentine_Day🌹😍 💞 स्वर्ग में तय होते हैं रिश्ते सुना है ऐसा, सब कहते हैं, जन्नत सा घर उनका जो इकदूजे के दिल💞 में रहते हैं ! जीवन कितना सूना होता तुम बिन सच ही हम कहते, खुशियों की इक गाथा उनमें आंसू जो बरबस बहते हैं ! हाथ🤝 थाम कर लीं थीं कसमें उस दिन जिस पावन बेला में, सदा निभाया सहज ही तुमने पेपर पर लिख कर देते हैं ! कदम-कदम पर दिया हौसला प्रेम 💘का झरना बहता रहता, ऊपर कभी कुहासा भी हो अंतर में उपवन खिलते हैं ! नहीं रहे अब ‘दो’ हम दोनों एक ही सुर इक ही भाषा है, एक दूजे से पहचान बनी संग-संग ही जाने जाते हैं ! आज यहाँ आकर पहुंचे हैं जीवन का रस पीते-पीते कल भी साथ निभाएंगे हम पवन, अगन, सूरज कहते हैं ! विवेकाजल💞✍️

अंतराष्ट्रीय महिलादिवस

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"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता" कैसे कर लेती हो ये सब ...सुबह सबसे जल्दी उठकर ,दिन की तैयारी करना ...साफ सफाई , किचेन , नाश्ता  बच्चों का पति का बूढ़े माता पिता का और खुद का भी ....योगा भी कर लेती हो ,सज सँवर भी लेती हो और हाँ मोबाइल में अपडेट भी रहती हो....निकल पड़ती हो अपने प्यारे माधव को स्कूल छोड़ने खुशी खुशी कैसे कर लेती हो इत्ता सब कुछ ...उन पुरुषों की तरह जो उठते हैं देर से , बेड टी माँगते हैं बेड पर , अखबार पढ़ते हैं , मोबाइल में चैटिंग भी करते हैं , निकल पड़ते हैं सेहत के नाम पर वॉकिंग में ....फिर निकलते हैं अपने काम पर तुमको झिड़कते हुए ,ताने मारते हुए ....पर तुम भी तो निकलती हो अपने दायित्व पर , कैसे कर लेती हो ये सब ....  पहुँचती हो अपने दुलारे के स्कूल , जो हो जाये कभी लेट लपेट ...तो घूरते हैं सब ऐसे ,मानो कह रहे हों ...क्यों तुमने की शादी ,क्यों बच्चे जने ,क्यों बूढ़े माँ बाप को आश्रय दिया ,क्यों तुमने ये दायित्व लिया ....औरत तेरा रूप निराला तो क्या बोलती है सुनो , क्या छोड़ दे अपने परिवार को , अपने सम्मान को ,अपने स्वाभिमान को ....हँस कर टाल देती हो उन क...

रंगों की होली

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आज गुरु जी थे बहुत घबराए , पूरी तैयारी से थे आये ...आज रहूँगा गर्म नहीं पड़ूंगा नर्म ...नहीं निकलने दूँगा किसी को क्लास से ...कपड़े भी पहनकर आये थे पुराने से ...पर उधर भी तैयारी थी जोरों की... चाहे हो जाये जो , होगी होली रंगों की ....कहाँ कहाँ नहीं छुपा था रंग ...बस्ते में , जेब में , किताबों के बीच ....क्लास में घुसते ही गुरू जी हो गए कड़क ...डर रहा था झलक , आँखे रही थीं फड़क ...बोले आज होगी सबकी तलाशी ...नहीं रहेगा कोई बाकी ...माल हुआ बरामद , सब कब्जे में ...अब जान में जान आई गुरू जी की ...लंच के बाद सभी आएंगे क्लास में ...हमें पता है आज क्या खेलोगे ...पूरा स्कूल सर पे उठा लोगे ...सब चल रहा था नियंत्रण में ...छुट्टी होने को बचा था आधा घण्टा ..."मे आई कम इन सर" की आवाज आई ...मुठ्ठी में कुछ दबाए दो पूर्व छात्राएं मुस्कुराईं ...आओ आओ लक्ष्मी, रिंकी ...बोलो कैसे आईं ...हैप्पी होली सर जी ...दबे , कुचले , मुरझाए बच्चों में जान आई ...बिना रंगों के चेहरों में दिख रही थी रोशनाई ...बस अबीर लगाएंगे आपको ...गुरु जी सहम गए ,बच्चों से चौतरफा घिर गए ....मिमियाते हुए बोले अच्छा सिर्फ तिलक लगान...

कैसे कर लेती हो ये सब

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"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता" कैसे कर लेती हो ये सब ...सुबह सबसे जल्दी उठकर ,दिन की तैयारी करना ...साफ सफाई , किचेन , नाश्ता बच्चों का पति का बूढ़े माता पिता का और खुद का भी ....योगा भी कर लेती हो ,सज सँवर भी लेती हो और हाँ मोबाइल में अपडेट भी रहती हो....निकल पड़ती हो अपने प्यारे माधव को स्कूल छोड़ने खुशी खुशी कैसे कर लेती हो इत्ता सब कुछ ...उन पुरुषों की तरह जो उठते हैं देर से , बेड टी माँगते हैं बेड पर , अखबार पढ़ते हैं , मोबाइल में चैटिंग भी करते हैं , निकल पड़ते हैं सेहत के नाम पर वॉकिंग में ....फिर निकलते हैं अपने काम पर तुमको झिड़कते हुए ,ताने मारते हुए ....पर तुम भी तो निकलती हो अपने दायित्व पर , * कैसे कर लेती हो ये सब .... * पहुँचती हो अपने दुलारे के स्कूल , जो हो जाये कभी लेट लपेट ...तो घूरते हैं सब ऐसे ,मानो कह रहे हों ...क्यों तुमने की शादी ,क्यों बच्चे जने ,क्यों बूढ़े माँ बाप को आश्रय दिया ,क्यों तुमने ये दायित्व लिया ....औरत तेरा रूप निराला तो क्या बोलती है सुनो , क्या छोड़ दे अपने परिवार को , अपने सम्मान को ,अपने स्वाभिमान को ....हँस कर टाल देती हो ...