अंतराष्ट्रीय महिलादिवस
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता"
कैसे कर लेती हो ये सब ...सुबह सबसे जल्दी उठकर ,दिन की तैयारी करना ...साफ सफाई , किचेन , नाश्ता बच्चों का पति का बूढ़े माता पिता का और खुद का भी ....योगा भी कर लेती हो ,सज सँवर भी लेती हो और हाँ मोबाइल में अपडेट भी रहती हो....निकल पड़ती हो अपने प्यारे माधव को स्कूल छोड़ने खुशी खुशी कैसे कर लेती हो इत्ता सब कुछ ...उन पुरुषों की तरह जो उठते हैं देर से , बेड टी माँगते हैं बेड पर , अखबार पढ़ते हैं , मोबाइल में चैटिंग भी करते हैं , निकल पड़ते हैं सेहत के नाम पर वॉकिंग में ....फिर निकलते हैं अपने काम पर तुमको झिड़कते हुए ,ताने मारते हुए ....पर तुम भी तो निकलती हो अपने दायित्व पर , कैसे कर लेती हो ये सब .... पहुँचती हो अपने दुलारे के स्कूल , जो हो जाये कभी लेट लपेट ...तो घूरते हैं सब ऐसे ,मानो कह रहे हों ...क्यों तुमने की शादी ,क्यों बच्चे जने ,क्यों बूढ़े माँ बाप को आश्रय दिया ,क्यों तुमने ये दायित्व लिया ....औरत तेरा रूप निराला तो क्या बोलती है सुनो , क्या छोड़ दे अपने परिवार को , अपने सम्मान को ,अपने स्वाभिमान को ....हँस कर टाल देती हो उन कातर निगाहों को जो करते हैं ईर्ष्या तुम्हारे खुद के दायित्व से, ...जलते भुंजते रहते हैं तुम्हारी स्वतंत्रता पर , तुमको मिले अधिकारों पर ...कैसे मुस्कुरा लेती हो इन सबके बाद भी ...दिन भर काम करती हो पूरे मन से ,नहीं रहना चाहतीं पीछे किसी से ....
पीछे रह भी नहीं सकतीं तुम किसी से ....तुमको शक्ति मिली है जाने कहाँ से ...
इसी लिए तो हम भी तुम्हारी हर जरूरत पूरी करने की कोशिश करते है बिना तुम्हारे कहे🌹🌹🌹💐❤️❤️💐
सभी कामकाजी महिलाओं को समर्पित 💐🙏
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
विवेक कुमार मिश्र✍️✍️💐

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें