प्रिय प्रेयसी
प्रिय प्रेयसी~ तुमने कभी शाख से अलग हो चुके पत्तों का प्रेम देखा है, नहीं देखा होगा, पतझड़ में जब बूढ़े हो चुके पत्तों की पकड़ शाख पर कमजोर हो जाती है, तो वो टूट कर गिर जाते हैं, पर उनका प्रेम तब भी नहीं मरता, वो इंतज़ार में होते है, एक हवा के झोंके की, जो उन्हें उड़ा कर ले जाये उस पेड़ की तरफ जिनसे उनका बिछड़ना हुआ था, वो आखिरी बार लिपट जाना चाहते हैं, उसी पेड़ के तने से, बस अपने प्रेम के साथ अंतिम कुछ पल जीने के लिए, किन्तु उस झोंके की आने की उम्मीद लगभग न के बराबर होती हैं, फिर भी पत्ते बिना किसी शिकायत उसका इंतजार करते रहते हैं । तुम्हें पता है, दीवारों के कान ही नहीं दिल भी होते हैं, यकीन नहीं है ना, तो सुनो, तुमने कभी पुरानी तस्वीरों की जगह बदली है, बदली ही होगी, तो जब तुमने पुरानी तस्वीरें दीवारों से उतारी होगी तो वहां एक निशान दिखाई दिया होगा तुम्हें, वो निशान कुछ और नहीं यादें हैं, जो दीवार समेट लिया करती हैं खुद में, लम्बे अंतराल के लिए नए रंग चढ़ा देने के बाद भी दीवारें अपने भीतर ही उन यादों को सँजोये रखती है,...