प्रिय प्रेयसी

प्रिय प्रेयसी~
          तुमने कभी शाख से अलग हो चुके पत्तों का प्रेम देखा है, नहीं देखा होगा, पतझड़ में जब बूढ़े हो चुके पत्तों की पकड़ शाख पर कमजोर हो जाती है, तो वो टूट कर गिर जाते हैं, पर उनका प्रेम तब भी नहीं मरता, वो इंतज़ार में होते है, एक हवा के झोंके की, जो उन्हें उड़ा कर ले जाये उस पेड़ की तरफ जिनसे उनका बिछड़ना हुआ था, वो आखिरी बार लिपट जाना चाहते हैं, उसी पेड़ के तने से, बस अपने प्रेम के साथ अंतिम कुछ पल जीने के लिए, किन्तु उस झोंके की आने की उम्मीद लगभग न के बराबर होती हैं, फिर भी पत्ते बिना किसी शिकायत उसका इंतजार करते रहते हैं । 
          तुम्हें पता है, दीवारों के कान ही नहीं दिल भी होते हैं, यकीन नहीं है ना, तो सुनो, तुमने कभी पुरानी तस्वीरों की जगह बदली है, बदली ही होगी, तो जब तुमने पुरानी तस्वीरें दीवारों से उतारी होगी तो वहां एक निशान दिखाई दिया होगा तुम्हें, वो निशान कुछ और नहीं यादें हैं, जो दीवार समेट लिया करती हैं खुद में, लम्बे अंतराल के लिए नए रंग चढ़ा देने के बाद भी दीवारें अपने भीतर ही उन यादों को सँजोये रखती है, बिना किसी शिकायत बिना किसी लाग लपेट,

         जानती हो मेरा ये जो प्रेम है तुमसे, ये बिल्कुल उस शाख से बिछड़ चुके पत्ते की तरह है, जो तुमसे बहुत दूर है, किन्तु एक झोंके के इंतज़ार में है, जिसके सहारे ये तुमसे आ लिपटे, कम से कम उम्र के अंतिम कुछ पल के लिए ही है, 
          और तुम्हारा मुझसे ये प्रेम बिल्कुल उस दीवार की तरह है, की जब मैं तुम्हारे पास नहीं रह जाऊंगा, तब तुम्हारे पास रह जाएंगी मेरी स्मृतियां जिनके सहारे तुम कभी कभी मुस्कुराओगी, कभी कभी उदास होगी तो कभी मेरी याद में तुम लिखोगी एक खत, उस पर कोई पता नही होगा, क्यों कि उनका पता तो तुम्हारी अलमारी की सबसे पीछे की दराज है, जहाँ तुमने ना जाने कितने खत लिख रखें हैं मेरे लिए मेरे नाम के साथ, मैं आज भी तुम्हारे दिल की दीवार पर उस पुरानी तस्वीर की तरह टँगा हूँ, जिसमे मैं और तुम एक साथ है, उम्र भर के लिए, 

                 
तुम्हारी शाख से लिपटा तुम्हारा-मैं♥️


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