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प्रेम दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💞

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वेलेंटाइन डे और ब्रेक अप ! बाज आ जाओ मुहब्बत से... मुहब्बत वालों हमने इक उम्र गंवाई है, मिला कुछ भी नहीं!! क्या जमाना आ गया है । अब प्रेम के लिये भी दिन तय कर दिया है । बाजार इस दिन को मनाने के लिए लाल-गुलाबी हुआ जा रहा है । गिफ्ट से अटा पड़ा है । लाल-लाल पान के पत्ते के आकार के तरह तरह के दिल दुकानों के बाहर लटक रहे है । छोटे से लेकर आदमकद के टेडी बियर पसरे पड़े है । बाजार ने प्रेम को भी बिकने वाली चीज बना दिया है ।  जिससे भी मिलिये.. मोहब्बत से मिलिये... लोग बताते नहीं.. मगर तन्हा बहुत हैं... किसी से कह देना...... कि, "हम तुमसे प्रेम करत हैं" अहम को खतम करने का सबसे सुंदर पड़ाव है।। हमको भी घर मे लेटे लेटे कई दिन हो गए थे आज कुछ आराम भी था और अनुज भाई भी आये थे, तो सोचा चलो प्रदर्शनी घूम आये तो दोनों लोग टहलते-टहलते प्रदर्शनी पहुंच गए । रास्ते मे बाजार की रंगीनियों ने ध्यान खींचा । प्रेम .. ये कितना प्यारा अहसास है ! कुछ सोच कर आँखों में एक पुरानी चमक लौट आयी । अगर आपने सचमुच किसी से प्रेम किया है, तो आप जानते होंगे, प्रेम जताना नही पड़ता, बताना नही पड़त...

वीथिन में, ब्रज में, नवेलिन में, वेलिन में,बनन में, बागन में, बगरो बसंत है।

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"वसंत के आते ही मौसम खुशनुमा हो जाता है, गुलाबी ठंड के साथ चारों ओर रंग बिरगें फ़ूलों की भरमार हो जाती है। खेतों में फ़ूली हुई पीली सरसों की आभा निराली हो जाती है लगता है कि धरती पीत वस्त्र धारण कर इठला रही है। रंग बिरंगी तितलियाँ फ़ूलों पर झूमती हैं तो भौरों का गुंजन मन को मोह लेता है तभी कवियों का मन भी इस सुंदरता को अपने शब्दों से बांध लेने का हो जाता है। अमिया के बौर से लदी डालियों पर कोयल की कूक भी गीत कविता का अंग बन जाती है। कहीं दूर चरवाहे की बंशी की तान से ग्राम्य सुंदरता सुरभित हो जाती है। गाँव की अल्हड़ बाला के पाँव के पायल की छनक भी प्रकृति की ताल में ताल मिलाती दिखाई देती है। अदभुत नजारा इसी मौसम में देखने मिलता है। वसंत आने पर ही मदन देव का मद महुआ के फ़ूलों के रस के रुप में प्राप्त होता है। जिससे मस्त होकर मदनोत्सव का उल्लास निराला हो जाता है। कहते हैं कि जब ब्रह्मा ने मनुष्य योनि की रचना की तो वे अपनी रचना से संतुष्ट नही हुए। उन्हे लगा कि कुछ कमी रह गयी। क्योंकि चारों ओर मौन छाया हुआ था। सन्नाटा उन्हे पसंद नहीं आया। तो उन्होने अपने कमंडल से धरती पर जल डाला तो एक अदभुत श...

प्रतीक्षा में

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प्रतीक्षारत हूँ  कब आएँगी वो चिट्ठियां  जिसके अंत में लिखा होगा  आपकी प्रतीक्षा में...  प्रारम्भ में लिखा होगा प्रिय,  मध्य में लिखी होंगी  बहुत सारी बातें  जहाँ प्रत्युत्तर में लिखा होगा  पत्र पढ़ कर प्रसन्नता हुई  कुशल रहने की प्रार्थना  और शुभेक्षा  फिर कुछ पुरानी बातें  जिन्हे याद कर  कभी रोना आया  और कभी जो  गुदगुदा गई मन को  जिन्हे पढ़ते हुए  उनकी छवि दिखे  और चेहरे पर उगती हुई  उनकी भावनाएँ ऐसा लगे जैसे  वो सामने बैठी हो, अपनी बातें बता रही हो  शब्दों में घुली चासनी का स्वाद अंतस तक उतारने का प्रयास कुछ शब्द जो  डबडबाई आँखों से  झिलमिल झिलमिल  नजर आ रहे  उनको छूकर  दूर होने का यास  न जाने कितनी बातें हैं  जो प्रतीक्षा में हैं।                                                              ...

वनन में बागन में बगरयो बसंत है

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प्रेम का उत्सव है बसंत आया न जाने कितने ही हृदयों में  अंकुरित होगा प्रेम बीज। आरंभ होगा कभी न होने वाले अंत का। उस उर में समाए आनंद का जो, समय के साथ ले लेगा परमानंद का रूप। जिसकी कल्पना मात्र मन, को प्रफुल्लित कर जायेगी। जो आत्मा में समा कर, स्वयं परमात्मा सा हो जायेगा जो रोम रोम में नव किरण सा समाएगा। पल प्रतिपल गंगा सा पावन, हो बढ़ेगा सागर की ओर। चाहे हो जंगल, बीहड़ या मरुस्थल कुछ भी न उसे रोक पायेगा। प्रेम के सागर में जो बिन सोचे समझे उतर जायेगा। संसार के भव सागर से वो पार हो जायेगा। प्रेम में उमंग है, उल्लास है। प्रेम कभी न बुझने वाली प्यास है.......!!!!! विवेकाजल✍️✍️

प्रेम तो बस प्रेम है

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जब किसी से प्रेम होने का अहसास होता है,तब न कोई अग्निसाक्षी होती है और न ही कोई सात वचन।प्रेम में बस होता है एक दूसरे को महसूस करने का एक प्यारा सा अहसास। ह्र्दय से महसूस करने का एक खूबसूरत सा अहसास जो बिना सोचे जाने एक दूसरे को एक प्यारे से बंधन में बांध देता है❤️ तुम वैभव हो मेरे मन के बसंत का और मैं उजड़ा हुआ चमन। तुम्हारी याद शीत में घाम जैसी है और मेरा इश्क सांझ की परछाईं। पल भर की तन्हाई कल जाती है तुम्हारे बिना वक्त बिताना कठिन हो जाता है तुम्हारी एक झलक के लिए निगाहें बेचैन सी हो जाती है। तुम मेरे धड़कनों की आधार हो प्रिये ।❤️❤️