एक नज़र
वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे दिल गवाही नही दे रहा था उनसे नजरे हटा ले, और वो देखो हमे छोड कर जा रहे थे वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे शमा जली थी जो मिलन की आंसूऔ से बुझी जा रही थी बैठे रहे इंतजार में मुद्दतो से और जुदाई की घड़ी भी आ रही थी रोकना चाहा इक पल फिर से उन्हे दामन में, जाने के पैगाम उन्हे जगा रहे थे वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे क्या करू मैं भी कहते हैं किस्मत से बगावत होती नही जो चाहते हैं हम तुम जिंदगी में मोहब्बत उस पल वो मिलती नही आइने आ जाए हजार सामने मगर, फिर भी तेरी सूरत मिला रहे थे वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे हमने आंसूऔ से इक रात और सही, तेरे इंतजार में लिख दी रोज रोज ये अदालतो में ये बेगुनाही की पेशी हमने लिख दी मालूम थी सजा हमे फिर भी ये गुनाह किए जा रहे थे वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे वो जिस दिन मिल कर बिछड रहे थे, ना जाने और क्यों याद आ रहे थे दिल गवाही नही दे रहा था उनसे नजरे हटा ले, और वो दे...