रंगों की होली
आज गुरु जी थे बहुत घबराए , पूरी तैयारी से थे आये ...आज रहूँगा गर्म नहीं पड़ूंगा नर्म ...नहीं निकलने दूँगा किसी को क्लास से ...कपड़े भी पहनकर आये थे पुराने से ...पर उधर भी तैयारी थी जोरों की... चाहे हो जाये जो , होगी होली रंगों की ....कहाँ कहाँ नहीं छुपा था रंग ...बस्ते में , जेब में , किताबों के बीच ....क्लास में घुसते ही गुरू जी हो गए कड़क ...डर रहा था झलक , आँखे रही थीं फड़क ...बोले आज होगी सबकी तलाशी ...नहीं रहेगा कोई बाकी ...माल हुआ बरामद , सब कब्जे में ...अब जान में जान आई गुरू जी की ...लंच के बाद सभी आएंगे क्लास में ...हमें पता है आज क्या खेलोगे ...पूरा स्कूल सर पे उठा लोगे ...सब चल रहा था नियंत्रण में ...छुट्टी होने को बचा था आधा घण्टा ..."मे आई कम इन सर" की आवाज आई ...मुठ्ठी में कुछ दबाए दो पूर्व छात्राएं मुस्कुराईं ...आओ आओ लक्ष्मी, रिंकी ...बोलो कैसे आईं ...हैप्पी होली सर जी ...दबे , कुचले , मुरझाए बच्चों में जान आई ...बिना रंगों के चेहरों में दिख रही थी रोशनाई ...बस अबीर लगाएंगे आपको ...गुरु जी सहम गए ,बच्चों से चौतरफा घिर गए ....मिमियाते हुए बोले अच्छा सिर्फ तिलक लगाना, नहीं तो ....जी सर जी ...फिर शुरू हो गया तांता ...क्या सर , क्या गाल , क्या माथा ....गुरू जी की हो गयी लीपा पोती ....चढ़ गए सब अपने सर जी के सर पर ....फिर मचा वो हुड़दंग ...गुरू जी नहीं दे रहे थे किसी को दण्ड ...सब थे होली की मस्ती में चूर ...गुरू जी का टूट गया था गुरूर..नन्हे मुन्नों ने कर दिया था मजबूर ....मन ही मन नाच रहे थे ...बच्चों की होली देख मुस्कुरा रहे थे ....।।
हैप्पी होली 🕺🕺🥰🥰
🥰☺☺💐💐

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