खुशियां




नए बहाने ढूँढ लाऐ,
कुछ तुम मेरे दिल तक आओ,
कुछ हम तुम्हारे दिल तक आऐ ।

चलो मुस्कुराने की,
कोई वजह ढूंढ लाऐ,
दूर रहने से दूरियाँ बढती है,
थोङी दूरी तुम तय करो मुझ तक
थोड़े पास हम चले आऐ तुझ तक।


विवेक कुमार मिश्र✍️

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