भड़िया वाले रोसेगुल्ला

भड़िया वाले रसगुल्ले

अपने देश की विशेषता है कि प्रत्येक क्षेत्र किसी न किसी स्वाद में अग्रणी है। कोई स्वाद राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुआ तो कोई स्थानीय स्तर पर ही अपनी छाप छोड़ पाया। इसी क्रम में आज चर्चा करेंगे चकलवंशी के प्रसिद्ध रसगुल्लों की। सामन्यतया बंगाल में रसगुल्लों का आशय छेने के रसगुल्लों से होता है किंतु उत्तरप्रदेश में गुलाब जामुन, काला जाम को भी रसगुल्ला नाम से ही जाना जाता है।
आइये पहले चर्चा स्थान की कर ली जाए क्योंकि बात ही स्थानीय स्वाद की हो रही है। उन्नाव से हरदोई राज्यमार्ग और बिठूर से सण्डीला राज्य मार्ग जहाँ पर एक दूसरे को काटते हैं वही स्थान नक्शे में चकलवंशी नाम से जाना जाता है। यह स्थान उन्नाव जनपद के सफीपुर विकास खण्ड के अंतर्गत आता है। उन्नाव से इसकी दूरी लगभग सैंतीस किमी होगी तथा बिठूर से बीस किमी की दूरी पर यह कस्बा है।
जब आप चकलवंशी चौराहे पर पहुँचेंगे तो आपको रस गुल्ले की बहुत सी दुकानें मिलेंगी। जब किसी स्थान की कोई चीज प्रसिद्ध हो जाती है तो आस पास उसी वस्तु की कई दुकानें खुल जाती हैं तो वास्तविक दुकान को पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में मैं अक्सर उस स्थान से थोड़ा आगे निकल जाता हूँ और स्थानीय लोगों से पुछताछकर वास्तविक दुकान के मालिक का नाम और पते की जानकारी लेता हूँ। चकलवंशी पहुँचने के बाद आगे सौ मीटर सण्डीला रोड पर जाकर कुछ लोगों से पूछा तो उन्होंने #प्यारेलाल हलवाई का नाम बताया कि उसी के रसगुल्ले सबसे स्वादिष्ट होते हैं।
  हम लोग वापस चौराहे पर आये और #प्यारेलाल जी की दुकान पता कर के वहीँ पहुँच गए। चौराहे की अन्य दुकानों की तरह यह दुकान चमक धमक से पूरी तरह दूर थी यहाँ तक कि दुकान और दुकानदार के नाम का बोर्ड भी नही लगा था। यह दुकान चौराहे से उन्नाव जाने वाली सड़क पर है।
  अब चर्चा करते है रसगुल्ले और उसके स्वाद की। एक रसगुल्ले का वजन 70 ग्राम से थोड़ा बहुत ही कम हो सकता है जिसके लिये आपको पन्द्रह रुपये देने होंगे। आपको देखने मे और स्वाद में यह प्रयागराज के देहाती रसगुल्ले जैसा लगेगा किन्तु इस रसगुल्ले में खोए की मात्रा अधिक है। जब आपको रसगुल्ला मिलेगा तो गरमामरम मिलेगा जिसमे सीरे की पर्याप्त मात्रा रहेगी। अधिकांशतः जो सीरा अंत मे बच जाता है उसे लोग फेंक ही देते हैं लेकिन इस रसगुल्ले में ऐसी बात नही है जब तक रसगुल्ला अंतिम स्थिति तक पहुँचेगा तब तक प्लेट का पूरा शीरा रसगुल्ले में समा कर उदरस्थ हो चुका होगा। एक रसगुल्ला आपके पेट को तो भर देगा किन्तु मन कुछ न कुछ खाली ही रहेगा।
  यदि आप रसगुल्लों को पैक कर के घर ले जाना चाहते हैं तो दुकानदार द्वारा ये रसगुल्ले मिट्टी की #भड़िया (मटकी) में पैक कर के दिये जाते है जिससे इनका सोंधा पन बना रहता है।
 चलिए बहुत बाते हो गयी ,यदि समय मिलें तो अवश्य इस लाजवाब स्वाद से अपनी रसना को प्रफुल्लित करें।
       विवेकाजल✍🏼 

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