मेरी पन्ना यात्रा
मेरी पन्ना यात्रा
*पन्ना, मध्य प्रदेश, भारत में स्थित एक शहर है।वैसे तो पन्ना हीरे की खदानो के लिए और बाघ के लिए पहले से ही बहुत चर्चा में रहता है ।*
पर आज हमलोग हीरा और बाघ से हटकर अद्वितीय बलदेव मन्दिर की चर्चा करते हैं।यह पौराणेतहासिक नगर है इसका उल्लेख विष्णु पुराण और पद्मपुराण में *किलकिल प्रदेश* से आता है वाकटाक वंश की उत्पत्ति स्थल है। नागवंश की कुलदेवी *पद्मावती* किलकिला नदी के तीरे विराजित हैं इसके कारण इसका नाम *पद्मा* और बाद में *परना* फिर *झिरना* और फिर 1933 के बाद *पन्ना* हुआ।
*तो आइये चलते है बुंदेलखंड के आंचल पन्ना जिले में* हमलोग पंहुंचे ही थे कि सौजन्य भाई ने फोन निकाला और फोन किया हर दिल अजीज बड़े भाई मुकेश पांडेय जी को उन्होंने बलदेव मन्दिर पर आने को कहा हम लोग बलदेव मन्दिर के सामने ही खड़े थे कि मध्यप्रदेश शासन की गाड़ी आकर रुकी पांडेय जी से सबकी औपचारिक मुलाकात हुई और सबने बलदाऊ भैया के दर्शन किये फिर मन्दिर के इतिहास भूगोल की जानकारी पांडेय जी से ली गयी और फिर पांडेय जी ने चंदन की खुशबू से लबालब भरा एक रसमलाई का डिब्बा निकाला सब लोगो ने खाया फोटो भी खींची गई तब तक घड़ी की सुई भी शाम के 8 बजा रही थी। हम लोग भी सुबह के निकले थे रात्रि विश्राम का निर्णय लिया गया बांकी की यात्रा कल,
तो मन्दिर की भव्यता और दिव्यता के बारे में वँहा के पुजारी जी व अपने पांडेय जी से हुई कुछ चर्चा के अंश को पेश करते हैं कुछ फोटोज भी संलग्न करते हैं आनंद लीजिए--
*भगवान कृष्ण के दाऊ भैया बलराम का एकमात्र मंदिर है जो बेहद खूबसूरत ,अद्वितीय, अनुपम ,अलौकिक,16 कलाओं से युक्त और अनोखा है।*
कृष्ण को विष्णु तो बलराम को शेषनाग का अवतार माना जाता है। कहते हैं कि जब कंस ने देवकी-वसुदेव के छ: पुत्रों को मार डाला, तब देवकी के गर्भ में भगवान बलराम पधारे। योगमाया ने उन्हें आकर्षित करके नन्द बाबा के यहां निवास कर रही श्री रोहिणीजी के गर्भ में पहुंचा दिया। इसलिए उनका एक नाम *संकर्षण* पड़ा।
बता दें कि दाऊ भैया बलराम जी का ये मंदिर *चर्च के स्टाइल* में बना है। माना जाता है कि पाश्चात्य और बुन्देली स्थापत्य कला को समेटे इस मंदिर में स्वयं हलधर भगवान बलराम विराजमान हैं। ये मंदिर लंदन के सेंटपॉल चर्च की तर्ज पर बनाया गया है। इस मंदिर में हर खिड़की बेल्जियम के कांच और पत्थर से बनी हुई है। और कौड़ियो के पेस्ट से प्लास्टर है अंदर के हर खँम्भे और दीवारों पर ।ये मंदिर राजा-रजवाड़े जमाने का बना हुआ है, जिसे पन्ना के राजा *महाराजा रूद्र प्रताप ने लगभग 140 साल पहले बनवाया था।*
कहते है भगवान श्री कृष्ण सोलह कलाओं से जन्मे तो इस मंदिर में भी सोलह का बड़ा महत्व है और हर की हर चीज सोलह की गिनती पर मिलती है देखने को जैसे
इस मंदिर की नींव ही 16 खम्भो पर बनी है अंदर घुसते ही 16 खम्भो का मण्डप ,16 गुम्बद, 16 झरोखे, 16 सीढ़ी, 16 खिड़की से अंलकृत है।
सोलह सीढ़ियों में 49 कट बने है जो उनचास पवन का प्रतीक हैं।
*हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।*
*अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास॥*
विशेषता भगवान शेषनाग का अवतार बलराम जी की सालिग्राम की प्रतिमा रोड से गेट से मन्दिर से और गर्भगृह से समान दर्शन होते है ।
बताया जाता है कि राजा को खेती से बड़ा लगाव था। इसी कारण से राजा ने यह मंदिर जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है.इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस मंदिर में धूमधाम से कृष्ण के भाई बड़े भाई का जन्मोत्सव मनाया जाता है।
ये जन्मोत्सव भादो महीने के छठे दिन मनाया जाता है। इस जन्मोत्सव में पूरे मंदिर को लाइट की जगमगाहट से सजाया जाता है। मंदिर में पूजन और कार्यक्रम में पन्ना राजघराने के सदस्य भी शामिल होते हैं।
इस मंदिर की मान्यत है कि जब भी किसान खेती की शुरुआत करते हैं तो इसी मंदिर से पूजन करने आते हैं। कहा कहा जाता है कि भगवान से अच्छी खेती के लिए कामना करने पर ये कामना पूरी हो जाती है।
तो प्रेम से बोलिये बलदाऊ भैया की जय🙏
हलधर भगवान की जय🙏
शेषावतार रेवती नंदन की जय🙏



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें