गुरु पूर्णिमा की असीम शुभकामनाएं

.          पितृभि: ताड़ित: पुत्रः 
                       शिष्यस्तु गुरुशिक्षित: ।
            घनाहतं सुवर्णम् च ,
                        जायते जनमण्डलम् ।।
[ भावार्थ :- 
   त्रुटियों के परिमार्जन हेतु पिता द्वारा पीटा गया पुत्र , श्रेष्ठ गुरु द्वारा शिक्षित किया गया शिष्य और हथौड़े से पीटा गया सोना , लोगों के मध्य आभूषणों की भाँति सुशोभित होता है ।]
                   तस्मै श्री गुरुवे नम:!
     " वन्दे महापुरुष ते चरणारविन्दम् 🛐 !!"
                                                   
विवेक कुमार मिश्र
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