यायावरों की रामलीला







दिनांक 18 जुलाई 2021 को एक मैसेज घनघनाया ये सौजन्य भाई की तरफ से था कि एक कार्यक्रम जो पूरी तरह से यायावरी को समर्पित है, का आयोजन दिनांक *20 जुलाई 2021* को (समय 6 से 9 ) फतेहपुर में *श्रीश भाई* के यहां होना निश्चित है जिसमे हम सभी को आने का स्नेहिल निमंत्रण मिला।
अब इसे दिव्य संयोग कहें या सोच समझकर किया गया आयोजन कि *देव शयन एकद्शी* के दिन *सुंदर काण्ड* का आयोजन था लेकिन एक शर्त रख दी गई
सभी पुरुष *धोती या लुंगी कुर्ता* में आयेंगे एवम महिलाएं *साड़ी* में ही आएंगी बिना इस निर्धारित वेश के प्रवेश वर्जित होगा। अब शर्त भी बड़ी अच्छी थी शुद्ध सनातन संस्कृति का आवरण तो हमे धारण अवश्य करना चाहिए।
तो कुछ सदस्य इसे सहर्ष स्वीकार कर लिए लेकिन कुछ सदस्य संकोच वस रह गए लेकिन हमने उन्हें भी इस पुनीत कार्य में आभासी रूप में सम्मिलित किया।

अब वो पुरुष सदस्य धोती की व्यवस्था में लग गए जिन्होंने कभी धोती को अपने पास भी नहीं आने दिया था जींस पैंट में चकाचक रहने वालों को अब धोती पहननी थी। ये कहे एक टास्क मिला हम सबको जिसे हमें बिना किसी बंदिश के पूर्ण करना था। कुछ ने लुंगी पहनने का निर्णय लिया कुछ ने धोती। हम भी धोती पहनने के लिए तैयार हो गए वैसे तो मैने धोती करीब 20,25 बार पहनी होगी लेकिन रेडीमेड वाली कभी ये तो कभी वो पहना देते थे जो कि आसान था पहन लेते थे,इस बार हमारा दुर्भाग्य था कि वो फट चुकी थी और कोई पहनाने वाला भी न था तो तुरंत नई धोती खरीदी और एक दिन पहले करीब एक घंटे धोती बांधने का प्रयास यू ट्यूब से देख देख कर किया और अंत में जब सीख गए। फिर धोती को धोकर अच्छे से प्रेस करके अगले दिन की प्रतीक्षा करने लगे।

नियत समय में हमारा उड़नखटोला हमको उठाने के लिए तैयार था। हम तो बहुत देर से तैयार बैठ गए थे उत्सुकता ही इतनी थी फिर व्यास जी को लेकर पहुंच गए श्रीश भाई के यहां। यहां पर प्रभु श्री राम और हनुमानजी को नमन करके अंदर कमरे में गए तो देखा सभी युद्ध स्तर पर धोती बंधवा रहे हैं कुछ लुंगी भी बंधवा रहे हैं। थोड़ा सा प्रयास हमने भी किया। लेकिन एक बात देखने को मिल रही थी जो सदस्य जितने हैंडसम पैंट शर्ट में दिखते हैं उस से कई गुना अधिक इस पारंपरिक परिधान में फब रहे थे। कुर्तों के एक से एक गजब के रंग देखने को मिल रहे थे। प्रदीप भाई का कुर्ता लाजवाब लग रहा था,अभिषेक भाई पहली बार धोती पहने थे,आशुतोष भैया तो शुद्ध कर्मकांडी लग रहे थे,विकास भाई पहली बार लुंगी पहने थे और ऊपर से लाल कुर्ता,प्रवेश भाई सफेद रंग के धोती कुर्ते में लाजवाब लग रहे थे, परिवार के तीन बच्चे यश,अमोघ और प्रियांश धोती कुर्ते में बिल्कुल राजा बाबू लग रहे थे।कुल मिलाकर सभी तैयार हो चुके थे बाहर आए और गुरुदेव दरवाजे पर पैंट शर्ट/कुर्ता पायजामा वालो को no entry का बोर्ड लगाए हुए थे।

सभी को धोती/लुंगी अनिवार्य कर दी गई चाहे उसमे वाद्य यंत्र वादक ही क्यू ना हों जिसके पास कोई व्यवस्था नहीं थी उनके लिए व्यवस्था की गई। सुमित भाई को उल्टे पांव धोती लेने भागना पड़ा ,शरद भाई जल्दबाजी में गुरुदेव की ही लुंगी लगा आए, ऋषि भाई बच गए कहा भी था गुरुदेव से मिल लो लेकिन बाबू में बाबू ऋषि बाबू टस से मस न हुए (मजाक था आप अपने कार्य में व्यस्थ थे)।

अब राम अभिलाष भाई ने पूजन प्रारंभ किया उसके पश्चात व्यास जी द्वारा सुंदर काण्ड का सस्वर वाचन किया
जिसका सम्पुट हमने ही रकहा था वैसे सभी लोगो ने सुझाव दिए पर अंत मे यही फाइनल हुवा
*कवन सो कठिन जग माहीं*
*जो नहीं होई तात तुम पाहीं*
और उसमे भक्तिमय होकर सभी ने साथ दिया पुरे मनोयोग से प्रभु की भक्ति में लीन थे। महिला शक्ति भी निर्धारित वेश में कार्यक्रम को सुशोभित कर रही थीं।जिनमे अर्चना जी ,सारिका जी,श्रद्धा जी,रश्मि जी, शुभ्रा जी,एवम अन्य। कुछ महिलाएं ऐसी भी रहीं जिन्होंने शायद 5-7वर्ष बाद साड़ी पहनी था। लेकिन आज सभी सनातनी अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे।

जुगेश दादा और श्रीश भाई आशु भाई अब तक ठंडाई बना चुके थे जिसका वितरण किया गया पूर्ण मेवा युक्त ठंडाई और उसके बाद फलाहार। एकादशी वृत को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की गई थी श्रीश भाई के द्वारा।

इस कार्यक्रम को और अधिक महत्व देने के लिए श्रीमान धर्मेंद्र प्रताप सिंह जी ने अपने मॉल से शॉपिंग करने पर 10% की छूट ( केवल यायावरों) के लिए की घोषणा भी कर दी थी ।

अब पाठ अपने समापन की ओर बढ़ रहा था भजन और संकटमोचन की आरती की समय सभी मंत्रमुग्ध होकर सहभागिता कर रहे थे। उसके बाद कुछ भजन प्रस्तुति श्रद्धा गौड़ जी और श्री मान आलोक दुबे जी ( डायरेक्टर फॉलीबुड फतेहपुर) द्वारा संपन्न की गई। इनके द्वारा गाया गया डोइट गीत मन को भा गया।

अब श्रीश भाई द्वारा दिए गए नाश्ते की बारी थी नाश्ता चल रहा था और सभी की फोटो बाजी भी। कार्यक्रम में कुल 50- 60 यायावर और बाकी अन्य सम्मानित अथिति गण भी उपस्थित थे।

अतुल अवस्थी जी का घर बिल्कुल पास होने के कारण कोई भी यायावर अपने आपको उनके आथित्य से रोक नही पा रहा था और अतुल भाई भी हंसते हंसते सबको लड्डू समोसा चाय के द्वारा संतृप्त कर रहे थे।

श्रीश भाई ने अपने पूर्ण मनोयोग,स्नेह के साथ सम्पूर्ण व्यवस्थाओं को उच्चतम स्तर तक रखने के लिए अथक परिश्रम किया और चेहरे पर वही मुस्कान निरंतर बनी रही।
प्रभु आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करे।आप सदैव खुश रहें।

कार्यक्रम का अब औपचारिक समापन हो चुका था तो सभी हंसते मुस्कुराते एक दूसरे से गले मिलते हुए और इस स्नेहिल भेंट को मन में बसाकर अपने अपने आवासों के लिए प्रस्थान करने लगे और हम भी अपने उड़नखटोले में बैठ लिया।
जय यायावरी
जय यायावर
विवेक कुमार मिश्र✍️✍️

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