एक यात्रा ,

मेरी पहली हवाई यात्रा


*मेरी पहली हवाई यात्रा*✈️

पहले कुछ बन जाओ , फिर सपने देखना हवा में उड़ने के ...बने भी तो प्राइमरी के मास्टर , फिर हवाई जहाज में उड़ने के सपने भी हवा होने लगे ... देश की किस्मत बदली तो मोदी जी ने हवाई चप्पल वालों को भी हवा में उड़ने के पंख दे दिए ।

दिसम्बर 2016 में मुंबई टूर का प्लान बन गया , जाने को सस्ती मद्दी स्पेशल ट्रेन में स्लीपर बर्थ मिल गयी ...पर वापसी का कोई साधन नहीं बना ... सौजन्य भाई साथ में थे तो निश्चिंत थे , साथ मे ले जा रहे तो लौटा कर भी लाएंगे ही ... ट्रेन चल पड़ी , पंकज भाई बेहद कूल मुम्बई पहुँचने को सोच रहे थे ... वहीं अमित भाई वापसी कैसे होगी इस बात पर व्यथित थे ... अभी ट्रेन प्रयागराज से आगे ही निकली होगी सौजन्य भाई ने फोन निकालकर वापसी की ट्रेनों की खोजबीन शुरू की ...इस ट्रेन में कोई सीट नहीं उस ट्रेन में इतनी वेटिंग ... अमित भाई  मजाक  में बोले जरा प्लेन में देखो ... अमित भाई मजाक शुरू करते हैं तो हम उसको और आगे बढ़ा देते हैं, लगभग ये हम लोगो का हंसी मजाक एक दूसरे पर तंज कसना हमेशा की बात है ...
फिर हमने तंज कसते हुवे पूंछ ही लिया, पंकज भाई आप तो एक बार लखनऊ से हैदराबाद प्लेन से जा चुके हो , देखो देखो हमें तो प्लेन की एबीसीडी भी नहीं पता ।

पंकज भाई मजाक को सीरियसली ले लिए ...सही सही में मोबाइल में खोजने लगे ... अचानक बोले स्पाइस जेट में मिल जाएगा , वो भी मुम्बई से सीधे कानपुर , दो घण्टे से भी कम टाइम में  वापसी हो जाएगी..
 आंय इतनी जल्दी , रेट देखो जरा सौजन्य भाई तपाक से बोले ... लगभग 5300 रुपिया प्रति व्यक्ति ... इतना सुनते ही सबके चेहरे उतर गए ।

फिर मास्टरों की गुणा गणित शुरू हुई ... अगर हम लोग ए सी ट्रेन से जाते आते तो कितना लगता , ट्रेन में समय कितना लगता , ट्रेन की लेट लतीफी अलग ...ट्रेन की इतनी  कमियाँ निकाली गयीं , जितनी आजतक किसी ने कल्पना भी ना की होगी ... आखिर जिंदगी में किया ही है  हम लोगों ने अपने लिए , आखिर कमाया ही किसलिए जाता है , लगता है बिना हवाई जहाज में बैठे ही ऊपर चले जायेंगे ..अब मामला इमोशनल होता जा रहा था , तीन लोग तो उड़ने का पूरा मन बना चुके थे.. हमको इसमें एक और फायदा दिखा कि हमें घूमने का एक एक्स्ट्रा दिन मिल जाएगा ...आखिरकार हमने भी हामी भर ही दी ... 

अब टिकट बुक कैसे हो , पेमेंट में हम लोगों से कोई लफड़ा ना हो जाये , बुकिंग गड़बड़ा ना जाये इसलिए हिम्मत नहीं पड़ रही थी ...
हमारी पूरी मुम्बई यात्रा की हर समस्या के तारणहार और कई विदेशी यात्राओं के अनुभवी सन्दीप चौरसिया जी को फोन लगाया गया ... सन्दीप भाई ने पाँच मिनट के अंदर हवाई जहाज के टिकट की फोटो हम सबके मोबाइल में भेज दी ।

अब क्या था मुम्बई जाने से ज्यादा लौटने की बेताबी हो गयी , बस टिकट की फोटो देखकर ही एक अमीर ,वीआईपी ,भौकाली टाइप की फीलिंग सवार हो गयी ... ट्रेन की स्लीपर बोगी के आधे यात्री तो अपने हाव भाव देखकर जान गए होंगे कि ये हवाई जहाज में उड़ने वाले हैं ।

       

हवाई जहाज का टिकट बुक होते ही हम जमीन से थोड़ा ऊपर उठ गए ... हो भी क्यों ना हवाई जहाज प्रतीक ही बना हुआ है अलग स्टेटस का , अमीरी का , आम आदमी से ऊपर का ... यात्रा का शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरा हो जब फ्लाइट , प्लेन , एयरपोर्ट इत्यादि शब्दावली हम सब की जबान से सौ पचास बार ना निकली हो ... हद तो तब हो गयी जब मुम्बई स्टेशन से धर्माशाला तक ले जाने वाले टैक्सी ड्राइवर से पूंछने लगे ... यहाँ से एयरपोर्ट कितनी दूर होगा , डाइवर बोला साहब चलिये आपको किसी अच्छे होटल ले चलते ... तो हमें कहना पड़ा , एक्चुअली वो धर्माशाला अपने रिलेटिव का ही है , इसलिए वही ठीक रहेगा ... आपस में हँसी मजाक का टॉपिक भी हवाई जहाज ही बन गया , कभी एयर होस्टेस तो कभी ये कभी वो ... सपने भी अजीब अजीब आने लगे ,एक बार तो सपने में हमारा प्लेन हाई जैक हो गया पर हम चारों ने हाईजैकर को दबोचकर प्लेन से बाहर फेंक दिया ...

खैर वो सुबह आ ही गयी जब हमें एयरपोर्ट के लिए निकलना था ...कई अनुभवी सलाहकारों ने समझाया था कि एयरपोर्ट दो घण्टे पहले पहुँच जाना , सिक्योरिटी चेकिंग में काफी समय लग जाता है ...दो बजे की फ्लाइट पकड़ने के लिए हम 10 बजे ही छत्रपति शिवाजी टर्मिनल डोमेस्टिक साइड वाले एयरपोर्ट के गेट पर पहुँच गए ... सब कुछ पहले से तय हो गया था कि पंकज भाई का एक बार प्लेन में उड़ने का अनुभव है इसलिए हम सब पंकज भाई के पीछे पीछे ही चलेंगे... किसी को अहसास ना होने पाए कि हम पहली बार हवाईजहाज में बैठ रहे हैं इसलिए गम्भीर रहना है , बचपना नहीं दिखाना इत्यादि ... सबने आधारकार्ड बाहर निकाल लिए और मोबाइल में टिकट की फोटो स्क्रीन में लाकर सिक्योरिटी ऑफिसर को दिखाई ... सीना जबरदस्ती ताने हुए पर सीने के अंदर ऐसी धुकुर पुकुर की पूँछिये मत ... कहीं कोई कमी ना निकाल दे और हाई सिक्योरिटी के चक्कर में कहीं और अंदर ना पहुँचा दे ... पर सीने की हलचल चेहरे में नहीं आ पाई और हम प्रथम प्रवेश द्वार से अंदर दाखिल होने में सफल हुए ... गज्जब का माहौल था अंदर लगा किसी दूसरी दुनिया मे आ गए ... पंकज भाई ने बताया पहला चरण लगेज चेकिंग का है लगेज यहीं से डायरेक्ट प्लेन में पहुँचा दिया जाएगा ...कुल लगेज में 22 किलो ले जा सकते जिसमें से सिर्फ सात किलो अपने पास रख सकते , ज्यादा हुआ तो एक्स्ट्रा चार्ज ... अब ये टेंशन शुरू से बनी हुई थी कि चेकिंग में कुछ पकड़ में ना आ जाये इसलिए सब्जी काटने वाली चाकू , बचे हुए पुआ , पानी की बोतलें इत्यादि धर्माशाला में ही छोड़ आये थे ... फिर भी मानसिक शांति  के लिए जमा करने वाले बैग में सामान कम हो गया और पास में रखने वाले लगेज का बोझा अधिक हो गया .... 

दूसरा चरण भी पास , हमारे पास फ्लाइट का टिकट हाथ आ चुका था ... अब क्या होगा , पंकज भाई बोले अभी एक और सिक्योरिटी चेकिंग से गुजरना होगा ... मन में फिर चिंता की रेखाएं उभर आयीं bp हाई लो होने लगा .... अमेरिका में सारे कपड़े उतरवाने के किस्से सुन रखे थे तो इधर पसीना छूटने लगा ... कहाँ फँस गए इन बड़े लोगों के चक्कर में इससे तो रेल सेवा लाख बेहतर , अब तो भाग भी नहीं सकते ... पर सब कुछ ठीक रहा कल्पना के विपरीत सिर्फ पर्स , बेल्ट और जेब ही खाली कराई ... इनकी चेकिंग मशीन से और हमारी चेकिंग मेटल डिटेक्टर से ...पर यह क्या एक लौंडा चेंकिग में कुछ अजीब सी हरकतें करने लगा तो उसे पुलिस वाले अलग खींच ले गए ... मेटल डिटेक्टर से गुजरने में भी टीं टीं बोलता ही है और इधर ख्याल आता बॉडी में आयरन होने के कारण बोला होगा ... उधर हम और सौजन्य भाई तो चेक करने वाले सिक्योरिटी ऑफिसर से ही पूंछतांछ करने लगे , आप प्रतापगढ़ से हो क्या ... वो बोला हाँ , ये बोले हम मास्टर , वो बोला हमारा भाई भी मास्टर , ये बोले कोई दिक्कत हो तो बताना , वो सबसे बोला ... मास्टर साहब लोग मुम्बई घूमने आए थे इनको कोई दिक्कत ना होने पाए ... अब क्या था भौकाल टाइट हो गया , चेकिंग के सारे चरण पार कर चुके थे ... अब हमें तीन घण्टे एयरपोर्ट का चप्पा चप्पा घूमकर ही काटने थे ... 

मुम्बई एयरपोर्ट है कि अच्छी खासी मार्केट , सबसे ज्यादा वाइन शॉप और न जाने क्या क्या ... प्यास लगी तो पीने का पानी पूंछा 20 वाली बोतल 80 की , 50 का समोसा ... सबकी ओर मुँह बिचकाते हुए अब उस जगह की कुर्सी पकड़ ली जहाँ से हवाई जहाज दिख रहे थे ... घर वीडियो कॉल लगा दी ये देखो जहाज कैसे उतर रहा ... कुल मिलाकर अब हमारी हरकतें वहाँ बैठे लोगों को अहसास दिलाने लगी थीं कि ये पहली बार हवाई जहाज में बैठने जा रहे ...

आखिर समय आ ही गया जब हम लोगों का प्लेन प्लेटफॉर्म में लग गया और हम घुसने के लिए लाइन में ... प्लेन के दरवाजे पर खड़ी एयर होस्टेस ने मुस्कुरा कर हाथ जोड़कर स्वागत किया ... अब आई सुपर वी आई पी वाली फीलिंग ... बड़ा सुना करते थे एयरहोस्टेस की खूबसूरती की , बला की अप्सरा होती हैं आज देखकर मंत्रमुग्ध भी हो गए ...हम सभी अपनी सीट पर बैठ चुके थे , विंडो साइड पंकज भाई उनके बगल में सौजन्य फिर हम ...और हमारे बगल में गलियारा फिर अमित भाई मतलब हम और अमित भाई विंडो से सबसे दूर ... तभी एक ऑडियो चलने लगा और एयर होस्टेस एक्शन से सारी चेतावनी और सावधानियां समझाने लगीं ... इधर हम बिना कुछ समझे हुए भी अच्छे बच्चे की तरह सिर हिलाने लगे ... 

तभी हम और हमको सुनकर सबने एक साथ मुँह से अचानक बोल पड़े *चलत विमान कोलाहल होइ , जय रघुबीर कहत सब कोई* ... सीट बेल्ट बंधे होने के कारण हम विंडो साइड की तरफ ज्यादा उचक नहीं पा रहे थे , यही हाल अमित भाई का था वो तो सबकी नजर बचाकर सीटबेल्ट खोल दिए ...और खड़े होकर बाहर झांकने लगे , बाहर सिर्फ रुई जैसे बादल दिख रहे थे ... पाँच सेकंड भी ना हुए होंगे कि एयर होस्टेस दौड़कर आई , फिर जमकर फटकार लगाई अमित भाई को और जबरदस्ती सीट बेल्ट बाँध ... फिर क्या था चुपचाप अमित भाई खिसियाये से बैठे रहे,कब कानपुर आ गया पता ही न चला।
अंत भला तो सब भला 
जान बची तो लाखों पाए
लौट के बुद्धू घर को आये ...
सुखद यात्रा।
धन्यवाद🙏

विवेक कुमार मिश्र✍️✍️

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